स्व सा सन्

जागो मृतप्राय ... जागॊ--ऒ---ऒ !!! प्रगति का आधार - ईमानदार विचार!

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चुनाव-2014 के मतदाताओं से / के प्रश्न... ?????

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चुनाव-2014 के मतदाताओं से प्रश्न… ?????

मित्रो; जैसा कि ‘स्वसासन्’ के नाम से स्पष्ट है “आप” और “स्वसासन” दोनों का उद्देश्यवास्तविक स्वतंत्रता की प्राप्ति ही है !वह भी बिना शस्त्र संधान किये बिना सड़कों पर इकट्ठे होकर नारे लगाए !

हालाँकि ‘हम भारतीय’ वास्तविक कम बनावटी अधिक हैं… ऐसा 2013 में विभिन्न राज्यों में हुए चुनावों के परिणामों से स्पष्ट हुआ ! अभी कुछ ही दिनों पहलेहममें से अधिकांश भारतीय (?) ‘मैं भी अन्ना’, ‘मैं भी अरविंद’, ‘मैं भी आम आदमी’ कहते नहीं थक रहे थे! यानी भारतीय जनमानस90% से भी अधिकबहुमत के साथ “भ्रष्टाचार” के विरुद्ध था! इनमें उन राज्यों के नागरिक भी थे जिनमें 2013 में आम चुनाव हुए थे ! देख लिया सबने किहम भारतीयों की कथनी और करनी में कितना बड़ा अंतर है ???

अभी तक का चुनावी इतिहास भी यही बताता है कि साढ़े चार – पौने पांच साल ‘नेताजी’ के नाम रोते रहने वाला मतदाताचुनाव आते ही अपने अपने बाहुबली / नेता आकाओं का अंधभक्त होउनकी जीत के लिएकमर कस तत्पर हो जाता है! भले चुनाव के पहले उसे कभीउस “बाहुबली / नेताजी ” से कोई काम ना पड़ा हो भले उस नेता नेपिछले चुनाव के बाद औरइस चुनाव के सर पर आने से पहले या जीवन में कभी भी उसे कभी कोई महत्व ना दिया हो, भले उसकी स्थितिउन बाहुबली / नेताजी की नजरों में कुत्ते की सी हो मगर उसी मतदाता को उन बाहुबली/नेताजी के द्वारानाम लेकर पुकारने मात्र से या व्यक्तिगत रूप से फोन कर या घर आकरया मोहल्ले की सभा में “अब सब तुम्हारे ही हाथ में है” कह देने मात्र सेऐसी प्रसन्नता मिलती है जैसे कुत्ते की गर्दन परबहुत दिनों बाद मालिक के हाथ फेरने से कुत्ते को होती है ! (…..और कुत्ता निहाल हो मालिक के तलवे चाटने लगता है!)

मुख्य राज नैतिक द्वारा दलों का वर्षों से यही दुस्साहस (मतदाता को कुत्ता समझने का) इस जागृत जनमानस वाले माहौल में भीजारी रहा … हर बड़े राजनैतिक दल के प्रत्याशियों में बड़ी संख्या में गंभीर अपराधों के आरोपी सम्मिलित थे ! कई तो गैर जमानती अपराधों के आरोपी होने कारण जेल में रहकर ही चुनावी रण का संचालन कर रहे थे ! आप में से अधिकांश अन्ना-अरविंद करते हुए “राईट टू रिजेक्ट” और “राईट टू रिकाल”का समर्थन कर रहे थे ! किन्तु जब सामने अवसर था तोरिजेक्ट की जगह सिलेक्ट कर दिखया !!!!!!!!!!!!!! जी हाँ ! “राईट टू रिजेक्ट” शुरु से ही आपके पास रहा है…उनके विरुद्ध उपयोग करने के लिएजिनको जरा जरा से प्रलोभनों में पड़करपिछली बार भी चुनने की गलती आपने की थी! और “राईट टू रिकाल” उनके लिए जो अपनी ताकतऔर गुंडों की सेना के दम पर चुनाव जीतकर आज भीइस गुमान में हैं कि उस क्षेत्र में उन्हें कोई हरा ही नहीं सकता !जो क्षेत्र विशेष की सीट को अपनी जागीर समझे बैठे हैं ! ‘राईट टू रिजेक्ट ‘ और ‘राईट टू रिकाल’ कानून बनने का ही इंतजार क्यों ??? अभी भी था / है आपके पास…उपयोग करते/ अब कीजिए! स्वयं ही परिवर्तन के सूत्रधार बनते/बनिये ! “राईट टूरिजेक्ट” कानून तब जरूरी होताजब सीमित राज नैतिक दलों को ही चुनाव लड़ने की पात्रता होती! क्या जरूरी है…कि किसी ‘विशिष्ट’ राज नैतिक दल केप्रत्याशी को ही वोट दिया जाए?????

क्या कभी कहीं कोई ऐसा चुनाव क्षेत्र भी रहा है…जहाँ कोई भी “सभ्य / सुसंस्कृत ” “आप” सा उम्मीदवार नव गठित दलों/ क्षेत्रीय दलों/निर्दलीयों में भी ना रहा हो ????? (निर्दलीय को भी विकास मद में उतनी हीसांसद / विधायक निधि मिलती है जितनी अन्य दलके टिकट पर जीतकर आये सदस्य को!)जीतने वाली पार्टी का भी आप केवल अनुमान ही लगासकते हैं !हो सकता है आपके दिए वोट से आपके पसंदीदा दल की सरकार बनी हो और यह भी हो सकता है कि वह दल विपक्ष में बैठा हो !!!

फिर क्या जरूरत है… किसी पारंपरिक राजनैतिक दल के ‘आपराधिक’ प्रत्याशी को ही मन मारकर चुनने की ??? फिर भी चुनना है तो चुनो आगे भी चुनते रहो मगर फिर बड़ते अपराधोंऔर भ्रष्टाचार की दुहाई मत दो !!! क्योंकिभ्रष्टाचार, बलात्कार, हेराफेरी, घोटालेबाजी, लूट, हत्या, गुंडागर्दी, जैसेअपराधी छवि/ पृष्ठभूमि केप्रत्याशी को चुनकर / सत्ता सौंपकर आप स्वयं उन्हेंआपके अपनों के साथ ऐसे अपराध करने आमंत्रित कर रहे हैं!!!!!

आप स्वयं भी तो अपराध ही कर रहे हैं …ऐसे भ्रष्टों को आपके अपनों के साथभ्रष्टाचरण, बलात्कार, लूट, हेराफेरी जैसे अपराध करने का लायसेंस देकर !!!

जागिये !

संभलिये !!!

कुत्ते मत बनिए !!!!!

सदा सोच समझकर वोट दीजिये !!!!!!!

अपने मताधिकार कासोच समझकर ही ”सही प्रयोग”अवश्य कीजिये !!!!!!!!!!

“सही मतदान आपका महत्वपूर्ण कर्तव्य है!

और सर्वाधिक मूल्यवान अधिकार भी है!!!”

धन्यवाद !!!!!!!!!!!!!!!!!!!

जय हिंद !

जय भारत !!!

वन्दे मातरम्!!!!!

-Charchit Chittransh-

(Global @ Search Engines)

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