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जागो मृतप्राय ... जागॊ--ऒ---ऒ !!! प्रगति का आधार - ईमानदार विचार!

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प्रियतम अब तो आ जाओ

Posted On: 28 Feb, 2014 Celebrity Writer में

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प्रियतम अब तो आ जाओ
रूठे कब से मान भी जाओ…..
प्रियतम अब तो आ जाओ!!
.
तपस ग्रीष्म की जलते बीती
तन में मन में तेज तपन
प्यासा तन कहे आकुल मन,
बरगद सा आँचल बन छाओ,
प्रियतम अब तो आ जाओ!
रूठे कब से मान भी जाओ…..
.
घटायें छाईं बरखा बरसीं
टिपटिप, रिमझिम और झमाझम
तरबतर तन में चाहे मन,
स्वाती की बूँदें बन बरसो,
प्यासे मन की प्यास बुझाओ
प्रियतम अब तो आ जाओ!!
रूठे कब से मान भी जाओ…..
.
जाड़ा तुम बिन बस तड़पन,
जलता मन, ठिठुरता तन,
पुकारती रही धड़कन-धड़कन
बीती रितु, बरस बीते जनम
कब बीतेगी कब भला ये अनबन?
नादानियाँ मेरी भूल भी जाओ
प्रियतम अब तो आ जाओ!!
रूठे कब से मान भी जाओ…..
प्रियतम अब तो आ जाओ!!



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