स्व सा सन्

जागो मृतप्राय ... जागॊ--ऒ---ऒ !!! प्रगति का आधार - ईमानदार विचार!

72 Posts

422 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4241 postid : 695782

"वास्तविक आज़ादी की ओर ..."(कान्टेस्ट)

Posted On: 29 Jan, 2014 social issues,Contest में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

SwaSaSan Welcomes You…

“वास्तविक आज़ादी की ओर …

स्वसासन”

(निवेदन- मित्र: मेरी वर्तमान परिस्थितियां दैनिक स्वाध्याय के सीमित पल
ही उपलब्ध करा पा रही हैं…
ब्लागों पर जाकर पठन-पाठन और प्रतिक्रिया सम्भव ना हो पाने के कारण,
मंच के सभी ब्लागगर मित्रों के प्रति सम्मान सहित
मेरे नये ब्लाग पोस्ट पर केवल त्वरित टिप्पणियाँ(स्टार रेटिंग) ही सक्षम हैं!
क्षमायाचना सहित प्रतिक्रिया की लिंक अक्षम रखी गईं हैं!)
-चर्चित

आजाद भारत के हम आजाद नागरिक

केवल मनमानी करने की आज़ादी

को ही आज़ादी मानें क्या ???

हमारे कुछ बुनियादी अधिकार हैं तो

कुछ आवश्यक कर्त्तव्य भी !

.

अन्यथा कैसी आजादी!

वास्तविक आज़ादी के लिए हमारा जागृत होना आवश्यक है .

“स्वसासन” इस दिशा में प्रयत्नशील भी है !

“स्वसासन” के सुझाव /मांगें / घोषणा पत्र

कुछ इस तरह हैं -

.

आनलाइन वोटिंग

.

[ ताकि व्यस्त एवं अनिच्छित वोटर भी अपने वोट दे सकें !

यदि वर्तमान सरकार व्यवस्था नहीं कर सकी तो "स्वसासन समर्थित आप की" सरकार अवश्य करेगी ]

.

संविधान में आवश्यक उचित संशोधन

.

[हमारा संविधान उच्च कोटि के प्रावधानों से परिपूर्ण तो है

किन्तु इन के 'कठोर परिपालन सुनिश्चित करने हेतु' अभी भी कुछ सुधार आवश्यक ]

.

सुचारू शासकीय कार्य सम्पादन

.

प्रत्येक शासकीय /अशासकीय कार्यालय में कार्यवाही सुनिश्चित करना

[शासकीय कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा अपने वेतन को आय का मुख्य श्रोत नहीं मानता]
(यानी वेतन से इतर घूस, हेराफेरी जैसे साधन ही प्रमुख आय हैं जिनके लिए!)

ऐसे कर्मचारियों से निजात हेतु

पुलिस आदि सहित विभागों में उचित वेतन,सुविधा, सेवा शर्तें व

उचित, कार्यसम्पादन हेतु तत्पर कर्मियों को ही सेवा लाभ ]

कुशल एवं उत्कृष्ट अधिकारी, कर्मचारी, राजनीतिज्ञ, नागरिक को

बड़े पारितोषिक की व्यवस्था

एवं

भ्रष्ट / असक्षम/ या /लापरवाह अधिकारी, कर्मचारी, राजनीतिज्ञ, नागरिक को

कड़े दंड की व्यवस्था

.

सुलभ एवं सुनिश्चित न्याय

.

न्यायपालिका से 99.99% तक सुनिश्चित न्याय

[हजार दोषी छूट जाएँ पर किसी निर्दोष को सजा ना हो !

को बदलकर

'ना कोई निर्दोष सजा पाए ना कोई दोषी छूट पाए '

पर लाना ]

.

केवल इतने सुधार भी हो जाएँ तो देश दस गुनी तेजी से

प्रगति पथ पर चल पड़े

किन्तु बिना आप सबके जागरूक सहयोग के

ऐसा कोई सुधार नहीं हो सकता !

इन विचारों के समर्थक

/

नए रचनात्मक सुझावों के स्वामी

संपर्क कर रूचि प्रदर्शित करें

/

“स्वसासन्” (स्वप्न साकार संघ) से सक्रिय सहयोग करें!

प्रत्येक बिंदु पर विस्तृत अगली कड़ियों में …



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran