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पीड़िता के बयान !

Posted On: 30 Dec, 2012 Celebrity Writer में

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पीड़िता के बयान !

(मेरे कार्यालय में, फुरसत के पलों में, सहकर्मी द्वारा प्रस्तुत एक उच्चस्तरीय व्यंग
जिसे निम्न स्तरीय जोक की तरह सुना-सुनाया गया…
को उचित शब्दों में प्रस्तुत करने का प्रयास है…. जिन्हें असहमति हो क्षमा करें!!!)
आर्थिक एवं सामाजिक विपन्न युवक राधे की सुन्दर युवा पत्नी रमिया,
गाँव में नए खुले स्कूल में साफ़ सफाई करने
और बच्चों को घेरे रखने का काम पाकर बहुत खुश थी !
राधे भी रमिया के नये काम से गौरवान्वित था!
हेड मास्टर रमिया के ‘काम’ से ‘बहुत खुश’ था !
हेडमास्टर के कृपालु होने से रमिया भी प्रसन्न .
एक दिन हेड मास्टर ने स्कूल के पीछे बने अपने क्वाटर में
रमिया को झाडू बुहारी के काम के बहाने बुलाया और रमिया से बलत्कार किया.
रमिया ने राधे से कहा…..
राधे ने लट्ठ उठाया और सीधे हेडमास्टर के घर की तरफ दौड़ पडा…
वहाँ पडौसियों से पता लगा हेडमास्टर सरपंच जी की तरफ गया है!
राधे थोड़ा ठिठका …फिर सरपंच जी के घर की तरफ तेज क़दमों से बढ़ा,
रास्ते में सोचता रहा कैसे सरपंच जी से बात करनी है …
सरपंच जी के सामने पंहुच और कुछ ना कर सका….
बस हेडमास्टर को घूरते-घूरते
सरपंच के पैर पकड़ लिए,
बोला
“मालिक… इस मास्टर ने मेरी बीबी को खराब कर दिया… ”
सरपंच
” क्या उलटा सीधा बक रहा है राधे ?
मास्टर जी तो उलटे तेरी बीबी की शिकायत लेकर आये हैं?”
“मालिक ! झूठा है ये मास्टर … आप तो रमिया को जानते हो….
वो इतनी बड़ी बात झूठी क्यों बोलेगी मालिक….?”
“ठीक है … ठीक है … मास्टर जी की बात तो हमने सुन ली….
रमिया के बयान लेने पड़ेंगे !”
“जी मालिक ! जैसा आप ठीक समझो … लिए आता हूँ उसे अभी ”
राधे ने थोड़ी ही देर में रमिया को लाकर सरपंच के सामने खडा कर दिया
“लो मालिक ये रही रमिया आप खुद ही पूछ लो ”
“हूँ! चल रमिया सामने वाले कमरा में पंहुच हम आ रहे हैं… ”
“मालिक … यहीं पूछ लेते मेरे सामने ” राधे ने प्रतिरोध किया
“साले! अपने आपको बहुत होशियार समझता है ? …
सिखा पढ़ा के ले आया होगा अपनी मेहरारू को….
लगा दो इल्जाम मास्टर जी पे…. दो चार हजार झटकने के लिए ….”
“नहीं मालिक ! आप तो जानो हो… हम मेहनत-मजूरी करते हैं…..”
रमिया ने अपनी बात रखनी चाही मगर
” चुप! हमसे मुंह लड़ाती है? चल सामने ”
रमिया ने राधे की तरफ देखा
राधे ने आँखों आँखों में अनुमति दी
और समझाईस भी देने का प्रयास किया…
रमिया सामने वाले कमरे की तरफ बढ़ी
पीछे से सरपंच भी राधे को वहीँ रुकने की ताकीद कर
कमरे में पंहुच गया !
सरपंच भीतर से दरवाजा बंद करने लगा तो रमिया ने रोकना चाहा
“पहले कभी बयान दिए हैं ?”
“नहीं मालिक”
“तो चुपचाप रह…. जैसे कह रहा हूँ कर…. जितना पूछ रहा हूँ बोल ….”
…….
आधेक घंटे में सरपंच बयान लेकर बाहर निकले रमिया अन्दर ही थी.
बोले ” मामला संगीन है राधे ; पुलिस में रिपोर्ट करानी होगी….
दरोगा से मेरी अच्छी पहचान है … फ़ोन कर दिया है …
वो भी आ रहे हैं बयान लेने …. यहीं पर ”
“जी मालिक…. जैसा आप ठीक समझो…
. हम गरीबों का तो आप ही सहारा हो…
आप खुद ही रमिया के बयानों से जान गए होंगे मालिक….
हम गरीब तो हैं मगर …..”
“हाँ.. हाँ ठीक है…. रमिया के बयानों ने पता लग गया कि
वो तेरे जैसों के घर के लायक नहीं थी…
उसे हम जैसों के घर होना चाहिए था
खैर!… तू जा अभी दरोगा जी को आने में घंटे दो घंटे लगेंगे ….
तब तक बच्चों के रोटी पानी का इंतजाम कर आ ”
“जैसा आप कहें मालिक …. पर उस मास्टर को सजा जरूर दिलवाना मालिक…..”
“ज्यादा ना बोल …. हमें ना बता कि हमे का करना है और का नहीं …. निकल अभी …
रमिया बयानों के बाद खुद से पंहुच घर जायेगी शाम तक …. चल निकल …”
राधे चुपचाप सर झुकाए घर कि तरफ चल दिया ….
दरोगा ने भी बयान लिए
दरोगा युवती के बयानों से चकित था !
उसे छोटे से गाँव में झाडू पोंछा करने वाली
साधारण सी युवती से ऐसे बयानों की आशा ना थी !
दरोगा ने युवती के ‘बयान’ अपने सीनियरों को भी
दिलाने के उद्देश्य से उसे सरपंच को बोल
रमिया को सरकारी जीप में बैठाया और
रास्ते में राधे को रोक कर बता दिया
“राधे ; मामला संगीन है…
साल्ले ! ये तेरे घर क्या कर रही है ?
इसे तो हमारे जेंसों के घर होना चाहिए था…
खैर ! सुन हम इसे कोतवाली ले जा रहे हैं….
वहाँ ठीक से बयान लेंगे हम….
और बड़े दरोगा जी भी….
दो तीन दिन में वापस छोड़ देंगे इसे वापस ”
राधे की समझ में कुछ नहीं आया, अचकचा कर बोला
“मालिक दो तीन दिन ? मैं भी साथ चलता हूँ …. ”
” क्या करेगा साथ चलकर साल्ले ! बयान इसके लेने हैं तेरे नहीं !
और फिर मैं, मेरे बड़े साहब, उनके बड़े साहब से लगाकर शायद मिनिस्टर साहब तक …
८-१० लोगों को बयान देने होंगे … २-३ दिन तो लगने ही हैं ….
मास्टरजी को जेल भेजने का पक्का इंतजाम तभी तो हो पायेगा ….”
बीच में ही रामियाँ बोल पडी
“हुजुर! सबेरे से शाम हो गयी….
आपने और सरपंच जी ने दिन भर बयान लाये …
इत्ते में ही सजा करवा दो हुजुर बा मास्टर को ”
राधे ने रामियाँ को समझाते हुए टोका
“हिम्मत रख रामियाँ ! मास्टर ने जो तेरे साथ किया उसकी सजा जरूर मिलनी चाहिए….
तुझे जितना खराब करना था मास्टर ने किया…. अब कैसा और किसका डर !
दरोगा जी और इनके जो भी साहब लोग बयान लेना चाहें
उन्हें हिम्मत के साथ बेधडक बयान देना ….”
इतने में दरोगा की जीप आगे बढ़ गई ….
अगले ६-७ दिनों तक रामियाँ की कोई खोज खबर नहीं मिली
तो राधे भी शहर की तरफ चल दिया
खोजते खाजते उस पुलिस स्टेशन तक भी जहां
रामियाँ के बयान चल रहे थे !
उसी समय होम मिनिस्टर भी गाडी से उतर अन्दर पंहुचे !
राधे ठिठक कर एक तरफ हो गया
आई जी साहब ने होम मिनिस्टर को बहार ही रिसीव किया
और उन्हें सादर रामियाँ के सेल के बाहर तक पंहुचाया
साथ ही रामियाँ को ताकीद की
” मिनिस्टर साहब खुद आये हैं बयान लेने …. समझी ! ज़रा ध्यान से ”
रामियाँ की रुंधे गले से सिसकती सी आवाज राधे के भी कानों में पडी
जो अभी अभी डरा सहमा सा अन्दर पंहुचा था
“हजूर… ! माइ..बाप…! खूना खून हो रही हूँ …. बयान दे – दे के …. अब और बयान नहीं दे सकती हजूर ….
मुझे ना मास्टर जी को ना किसी को … कोई सजा नहीं दिलानी माइबाप … बस … मुझे घर छुडवा दो …. ”
वो बिलख बिलख कर रोने लगी थी …..
और सीधे सादे राधे को ढेर सारी समझ आ गयी थी ….
मगर बहुत देर हो चुकी थी !!!
अगले दिन अखबार में खबर थी
“जालिम पति ने बलात्कार पीड़ित पत्नी का थाणे में घुसकर बड़ी चालाकी से
एक पुलिसकर्मी के हथियार से क़त्ल कर दिया, पत्नी का दोष केवल इतना था कि वो बलात्कार होने की शिकायत लेकर
थाने पंहुची थी, हत्यारे पति ने औचक निरीक्षण पर पंहुचे होम मिनिस्टर पर भी हमला किया किन्तु थानेदार की सतर्कता से ना केवल होम मिनिस्टर सुरक्षित हैं बल्कि हत्यारे पति को भी थानेदार की गोली ने धराशायी कर दिया !”
(मित्रो; लगभग यही हालात हैं हमारे क़ानून व्यवस्था के…
यदि किसी स्त्री पर दुर्भाग्यवश बलात्कार हो जाए
तो उसे उसपर हुए अत्याचार के दोषी
को सजा दिलाने के नाम पर उसे
कई और बलात्कार सहन करने ही होते हैं …
शरीर नहीं तो आत्मा तो लहूलुहान हो ही जाती है बयान देते देते !)



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