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चुनाव 2012 के मतदाताओं से ...

Posted On: 19 Jan, 2012 Celebrity Writer में

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चुनावी राज्यों के मतदाताओं से …
.
मित्रो;
जैसा की नाम से स्पष्ट है “स्वसासन” का उद्देश्य वास्तविक स्वतंत्रता की प्राप्ति ही है ! वह भी बिना शस्त्र संधान किये बिना सड़कों पर इकट्ठे होकर नारे लगाए !
हम कितने वास्तविक हैं कितने बनावटी यह ५ राज्यों में होने वाले चुनावों के परिणामों से स्पष्ट हो जाएगा !
अभी कुछ ही दिनों पहले हममें से अधिकाँश ‘मैं भी अन्ना’ कहते नहीं थक रहे थे !
यानी जनमानस ८० से अधिक प्रतिशत बहुमत के साथ “भ्रष्टाचार ” के विरुद्ध था !
इनमें इन ५ राज्यों के नागरिक भी थे जिनमें आम चुनाव होने जा रहे हैं !
देखना है की हमारी कथनी और करनी में कितना अंतर है ???

अभी तक का चुनावी इतिहास तो यही बताता है कि

साढ़े चार – पौने पांच साल रोते रहने वाला मतदाता

चुनाव आते ही अपने अपने बाहुबली आकाओं का अंधभक्त हो

उनकी जीत के लिए कमर कस तत्पर हो जाता है !

भले चुनाव के पहले उसे कभी उस “बाहुबली नेता ” से कोई काम ना पड़ा हो भले उस नेता ने पिछले चुनाव के बाद और इस चुनाव के सर पर आने से पहले या जीवन में कभी भी उसे कभी कोई महत्त्व ना दिया हो, भले उसकी स्थिति उन बाहुबली की नजरों में कुत्ते की सी हो मगर उसी मतदाता को उन बाहुबली के द्वारा उसे नाम से पुकारने मात्र से या व्यक्तिगत रूप से फोन कर या घर आकर या मोहल्ले की सभा में

“अब सब तुम्हारे ही हाथ में है ” कह देने मात्र से ऐसी प्रसन्नता मिलती है जैसे कुत्ते की गर्दन पर बहुत दिनों बाद मालिक के हाथ फेरने से कुत्ते को होती है !

(और कुत्ता ख़ुशी ख़ुशी मालिक के तलवे चाटने लगता है !)
इतने कड़े शब्द लिखने का कारण मुख्या राजनैतिक दलों का यह दुस्साहस कि इस जागृत जनमानस वाले माहौल में भी हर बड़े राजनैतिक दल के प्रत्याशियों में बड़ी संख्या में गंभीर अपराधों के आरोपी सम्मिलित हैं ! कई तो गैर जमानती अपराधों के आरोपी होने कारण जेल में रहकर ही चुनावी रण का संचालन कर रहे हैं !

आप में से अधिकांश अन्ना अन्ना करते हुए “राईट तो रिजेक्ट ” और “राईट तो रिकाल” का समर्थन कर रहे थे अब दिखाइए रिजेक्ट करके तो जानें !!!!!!!!!!!!!!

जी हाँ ! “राईट तो रिजेक्ट”

उनके लिए जिनको जरा जरा से प्रलोभनों में पड़कर पिछली बार चुनने की गलती आपने की थी !
और “राईट तो रिकाल” उनके लिए जो अपनी ताकत और गुंडों की सेना के दम पर इस गुमान में हैं कि उस क्षेत्र में उन्हें कोई नहीं हरा सकता ! जो क्षेत्र विशेष की सीट को अपनी जागीर समझे बैठे हैं !pन्तजार मत करो इनका उपयोग अभी करो !
“राईट तो रिजेक्ट ” तब जरूरी होता जब सीमित राजनैतिक दलों को ही चुनाव लड़ने की पात्रता होती ! क्या जरूरी है कि किसी बड़े राजनैतिक दल के प्रत्याशी को ही वोट दिया जाए ?????

क्या कहीं कोई ऐसा चुनाव क्षेत्र है जहाँ कोई “सभ्य / सुसंस्कृत ” उम्मीदवार निर्दलीयों में भी ना हो ?????

(निर्दलीय को भी उतनी ही सांसद / विधायक निधि मिलती है जितनी अन्य दल के टिकेट पर जीतकर आये सदस्य को !)

जीतने वाली पार्टी का भी आप केवल अनुमान ही लगा सकते हैं ! हो सकता है आपके दिए वोट से आपके पसंदीदा दल कि सरकार बने और यह भी हो सकता है कि वह दल विपक्ष में बैठे !
फिर क्या जरूरत है किसी मान्य राजनैतिक दल को ही मन मारकर चुनने की ???
फिर भी चुनना है तो चुनो मगर फिर बड़ते अपराधों और भ्रष्टाचार की दुहाई मत दो !!!

क्योंकि अपराधी प्रवृत्ति के लोंगों के हाथ में सत्ता सौंपकर आप स्वयं अपराध / भ्रष्टाचरण के भागी बन रहे हैं !

स्वयं भी अपराध ही कर रहे हैं !!!

जागिये !

संभलिये !!!

कुत्ते मत बनिए !!!!!

सोच समझकर वोट दीजिये !!!!!!!

अपने मताधिकार का सही प्रयोग अवश्य कीजिये !!!!!!!!!!

धन्यवाद !!!!!!!!!!!!!!!!!!!

जय हिंद !!!!!

-चर्चित



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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
January 24, 2012

बहुत सन्दर संदेश है आपका, लेकिन यदि आपका यह संदेश ब्लॉग तक सिमिट कर रह गया, तो निश्चित ही लोकतंत्र की पराजय होगी। कृपया इसे भी पढ़े– “क्या यही गणतंत्र है” “आयुर्वेदिक दिनेश के दोहे भाग-2″ http://dineshaastik.jagranjunction.com/

    Charchit Chittransh के द्वारा
    January 24, 2012

    मित्र दिनेश जी; बहुत बहुत धन्यवाद् ! क्या करें साधन सीमित हैं ! (सहयोग अपेक्षित है !) ….अन्यथा हर एक भारतीय को झकझोर कर कहता क्या कर रहे हो भाई ! क्यों उसी डाल को काटने वाले के हाथ में कुल्हाड़ी दे रहे हो जिस डाल पर तुम्हारा घोंसला / घरोंदा है !!!

mparveen के द्वारा
January 19, 2012

चित्रांश जी बिलकुल सही अभी नहीं तो कभी नहीं ….. साथियों दिखा दो अपने वोट की कीमत यही तो एक पासा है जिसके बल पर आप एक अच्छा नेता चुन सकते हो तो समझदारी से काम ले ….

    abodhbaalak के द्वारा
    January 19, 2012

    चित्रांश जी, हम भी आपके साथ प्रतीक्षा कर रहे हैं, पर सच तो ये है की वोट भ्रष्टाचार के नाम पर न पद के जात धर्म, धन गुंडागर्दी ………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Charchit Chittransh के द्वारा
    January 19, 2012

    मित्र नवीन जी एवं वोध जी; बहुत बहुत धन्यवाद् ! आप सबसे प्रार्थना है की अपनी अपनी लेखनी को आपकी अपनी शैली में इस विषय (राष्ट्र-हित) पर लिखने प्रेरित करें !मेरे मत में कोई भी बुद्धिजीवी किसी भी व्यक्ति , जाती, धर्म, राजनेता या राजनैतिक दल का ना तो अंध समर्थक हो सकता है ना ही धुर विरोधी प्रकरण विशेष अनुसार ही समर्थन या विरोध उचित है !

shashibhushan1959 के द्वारा
January 19, 2012

आदरणीय चित्रांश जी, सादर ! बिलकुल सही बात है, अब समय आ गया है दलों की मोह माया से ऊपर उठकर अच्छे उम्मीदवार को चुनने का, भले ही वह निर्दलीय क्यों न हो ! शुभ आह्वान !

    Charchit Chittransh के द्वारा
    January 19, 2012

    मित्र शशिभूषण जी; वन्दे मातरम् ! आव्हान को आपके समर्थन का धन्यवाद् ! “जाज ” से भी ऐसी ही अपेक्षा थी किन्तु …. जय हिंद !!!


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