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जागो मृतप्राय ... जागॊ--ऒ---ऒ !!! प्रगति का आधार - ईमानदार विचार!

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मेरा शुरूर ...!

Posted On: 20 Nov, 2011 Celebrity Writer में

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इस तरह पी तो क्या पी शराब …
कि होश ना बाकी रहे ….

इस तरह पी तो क्या पी शराब …
कि होश में बाकी रहे …
.
तुम्हें मुबारक तुम्हारी….

मैं मेरी शराब का मुन्तजिर…

तुम्हारी शराब फीकी है ,

मुझे ताउम्र का शुरूर है !
.

वो साकी याद उसकी
.

मय-ए-समुन्दर है …
.

ख़यालों का प्याला है ,
.

खयालों में पी रहा हूँ !!!



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abodhbaalak के द्वारा
November 22, 2011

चर्चित जी क्या समा बंधा है आपने बहुत खूब :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Charchit Chittransh के द्वारा
    November 22, 2011

    मित्र; बहुत बहुत धन्यवाद् ! बस जो दिल में आया लिखता चला गया !

akraktale के द्वारा
November 22, 2011

नशा शराब का ऐसा की जिन्दगी भर ना उतरे, इस बहाने ही साकी की कुछ हसरत तो निकले.

    Charchit Chittransh के द्वारा
    November 22, 2011

    शुरू सुरा से कर पीने लगा हूँ हाला ; एक प्याला दो प्याला नहीं काफी, खाहिश है हलाहल की ले आओ …. छुपी पर्दों में कहीं है वो साकीबाला !

Rajkamal Sharma के द्वारा
November 21, 2011

आदरणीय चित्रांश जी …..सादर प्रणाम ! आपके दर्शन करके कृतार्थ हुआ …. सुबह रचना देखि थी अब आपने इसमें लेने जोड़ कर इसको पूर्णता प्रदान कर दी है ….. “कौन कहता है की हम बेहोश हो जाते है पीने के बाद हमे तो यारो होश ही आ पाता है पीने के बाद” क्या “शुरूर” का अर्थ भी नशा ही होता है ? आभार सहित धन्यवाद

    Charchit Chittransh के द्वारा
    November 22, 2011

    अनुज; मेरे दर्शन कर के स्थान पर ‘मेरे दर्शन पर ‘ कृतार्थ हों तो अधिक प्रसन्नता होगी ! हाँ लगभग वही वही अर्थ है ‘शुरूर ‘ का किन्तु नशे की हद बेहोशी तक होती है जबकि शुरूर आनंदमयी मदहोशी तक सीमित ! जब आत्मा का ‘ मूल ‘ से एकात्म होना संभव हो जाता है तो बस केवल आनंद ही शेष रह जाता है ! अगली रचना श्रंखला बद्ध इसी आनंद को समर्पित !

वाहिद काशीवासी के द्वारा
November 21, 2011

अपने जोशो जुनून और लक्ष्य के प्रति समर्पण एक नशा ही तो है। आभार,

    Charchit Chittransh के द्वारा
    November 21, 2011

    मित्र; मुद्दतों के बाद मुलाक़ात ! आप तुकबंदी के मौजू तक पंहुचे तो लगा मेरी कोशिश कामयाब हुई ! बहुत बहुत धन्यवाद् !

shashibhushan1959 के द्वारा
November 20, 2011

आदरणीय, सादर. लोग क्या-क्या न पिया करते हैं, कुछ तो मय पि के जिया करते हैं. क्या बुरा है शराब में यारों, हम नहीं खून पीया करते हैं. . उनकी उल्फत में ढालकर मीना, जख्म सीने का सिया करते हैं, लोग पीकर शराब के प्याले, फैसले हक़ के दिया करते हैं. . लेकिन ये अच्छी बात नहीं है.

    Charchit Chittransh के द्वारा
    November 21, 2011

    लेकिन ये अच्छी बात नहीं, मरहम पुर्शी की ख्वाहिश में दिल चीर दिया करते हैं ! चंगे उनकी आह्ट से होते हम लोग उनके फ़न की दुआ करते हैं ! . खून मुक़ाबिल हो तो, शराब अच्छी है ना, पी जाए हिजाब मुक़ाबिल हो तो किसे फिर याद शराब की आये ! . अपना अपना खुमार है सबका अपना अपना आदाब है सबका ! खून पीने की मगर लत है जिन्हें, बेमानी हैं उन्हें क्या शराब क्या हिजाब …


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