स्व सा सन्

जागो मृतप्राय ... जागॊ--ऒ---ऒ !!! प्रगति का आधार - ईमानदार विचार!

72 Posts

422 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4241 postid : 387

पूजूं कैसे राम को ? पूजता हूँ रावण को ....

Posted On: 10 Sep, 2011 Celebrity Writer में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

(प्रसंगवश पुनर्प्रसारित)

पूजूं कैसे राम को ? पूजता हूँ रावण को ….

जी हाँ मैं रावण और मेघनाद की आराधना करता हूँ !
कभी कभी श्रीकृष्ण की कुटिलताओं को ध्यान में रखकर उन्हें भी भज लेता हूँ !
किन्तु राम को नहीं पूजता हूँ !
पूजूं भी कैसे ?
मुझसे मुंह में राम बगल में छुरी रखना नहीं होता !
मुझे रावण के राम के हाथों मरे जाने पर स्वर्ग जाने वाले कथन पर विश्वास नहीं होता !
मुझे तमाम गुनाहों के बाद किए एहद करने से खुदा बंद से माफ़ी मिलने वाली बात पर यकीं नहीं होता !
मुझे किये गए पाप को चर्च में कान्फेसन बॉक्स में बैठकर प्रीस्ट को सुनाने से पाप मुक्त होना स्वीकार नहीं !
और सबसे बड़ी बात ….
मरने के बाद मिलने वाले किसी सुख की ना तो चाह है ना ही इस धारणा पर विश्वास !
मैं जो देखता हूँ वही जानता हूँ वही मानता भी हूँ !
मैं मानता हूँ की यदि मैंने गलतियाँ की हैं तो उसके प्रतिफल अवश्य मेरे सम्मुख आज नहीं तो कल आयेंगे ही आयेंगे !
मेरे जीवन काल में नहीं तो आने वाली पीदियों के सामने ….
नहीं तो यदि मृत्यु के बाद कोई कोई अवस्था है तो उसमें ….
अन्यथा यदि कोई पुनर्जन्म है तो उसमें ….
हर हाल में मुझे मेरे सत और असत कर्मों को प्रतिफल के रूप में स्वीकारना ही होगा !
किन्तु मुझसे राम के मंदिर में जाकर घंटों पूजा पाठ का पाखण्ड कर
वापस आते ही पुनः रावण मेघनाद का अनुसरण नहीं होता !
मैं राम के प्रति आदर रखता हूँ ! श्रद्धा भी !
किन्तु उन्हें पूजकर मेरा लोकपरलोक सुधारने की कामना नहीं !
में राम को जीना चाहता हूँ !
पहले रावण को जिया तो रावण को सराहा रावण को ही पूजा !
सच कहूँ तो मुझे आज भी रावण के दोष नजर नहीं आते !
किन्तु मेघनाद में रावण से अधिक गुण दिखे तो उसे अपना लिया !
उसकी आराधना की !
फिर कृष्ण प्रिय लगने लगे !
अब कृष्ण को जी रहा हूँ !
कृष्ण को ही पूजता हूँ !
जिस कारण सबकी राम के प्रति श्रद्धा है उसी कारण मेरी भी है !
मैं भी उन्हें पूजना चाहता हूँ !
किन्तु अभी स्वयं को इस योग्य नहीं पाता…
मैं उनका अनुसरण करना चाहता हूँ !
तब ही उन्हें पूजना चाहता हूँ !
प्रयासरत हूँ !
शायद इसी जीवन में राम को पूज सकूँ …..

| NEXT



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

8 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

akraktale के द्वारा
September 13, 2011

श्रीमान् सुंदर विचार मर्त्योपरांत खुशी की चाहत नहीं और बिना जानें अनुसरण नहीं अवश्य ही हम इंसान हैं भेडें तो नही.

    Charchit Chittransh के द्वारा
    September 21, 2011

    मित्र ; वाह ! आपने एक ही पंक्ति में पूरा ब्लॉग सन्देश स्पष्ट कर दिया ! बिना जानें अनुसरण नहीं ! अवश्य ही, हम इंसान हैं ! भेडें तो नही. !!! बहुत बहुत धन्यवाद् ! जय हिंद !

Abhishek Tripathi के द्वारा
September 11, 2011

बहुत सुन्दर रचना समाज के सामने एक अनछुए पहेलु को बड़े ही अलंकारिक तरीके से प्रस्तुत किया उम्दा प्रयास

    Charchit Chittransh के द्वारा
    September 11, 2011

    मित्र; मुझे विवाद उत्पन्न होने का भय था किन्तु अभी तक आये सुधि संदेशों के बाद निश्चिंतता हो गई है ! बहुत बहुत धन्यवाद् ! जय हिंद !

Santosh Kumar के द्वारा
September 10, 2011

आदरणीय चित्रांश जी ,.सादर अभिवादन आत्मा को झकझोरने वाली रचना ,…ह्रदयतल से कोटिशः साधुवाद अनुसरण किये बिना केवल पूजने से श्री राम जी भी दुखी ही होते होंगे ,…पूजा यदि शक्ति पाने के लिए ही करनी है तो रावण में क्या बुराई है ,….कर्मो का प्रतिफल सुनिश्चित है ,..तो सद्कर्म क्यों नहीं ??….. बहुत धन्यवाद

    Charchit Chittransh के द्वारा
    September 10, 2011

    बहुत बहुत धन्यवाद् ! मित्र !

abodhbaalak के द्वारा
September 10, 2011

चित्रांश जी सच कहा है, राम को जीना ही जीवन को सफल बना सकता है, आपने अपनी बात को बढे ही तार्किक ढंग से रखा है……. आशा करता हूँ की आपकी ये रचना …………… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Charchit Chittransh के द्वारा
    September 10, 2011

    बहुत बहुत धन्यवाद् ! मित्र ! jai hind !


topic of the week



latest from jagran