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अन्ना जी पर ' जाज ' के सवालों का जबाब !

Posted On: 21 Aug, 2011 Celebrity Writer में

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जाज ब्लॉग पर अन्नाजी के आन्दोलन के सम्बन्ध में कुछ प्रश्न भी उठाये गए हैं ,
मेरे जबाब -

महानुभाव ;
उत्तम विषय पर उचित आशंकित/आकांक्षित प्रश्नों की प्रस्तुति हेतु साधुवाद !
१. जी हाँ ; अन्नाजी का विशिष्ठ व्यक्तित्व और हमारी केवल विशिष्ठ जनों की बातों पर ही ध्यान देने की प्रवृत्ति के के कारण ही यह आन्दोलन आज इस उंचाई तक पंहुच सका है ! अन्नाजी की सहज एवं सरल किन्तु ओजस्वी एवं प्रभावशाली वक्तव्य शैली का निश्चय ही बहुत बड़ा योगदान है ! भले ही अन्नाजी को इस आन्दोलन के नेतृत्व का न्योता देने वाली सिविल सोसाइटी की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो ! ये तो केवल पहली मांग है जो ना केवल अन्नाजी की वरन हम सबकी है !
अन्नाजी और सिविल सोसाइटी की यह और आगे आने वाली मांगें
विगत २१ साल पूर्व मुझसे अदना व्यक्ति द्वारा लिखी गईं और विगत १ वर्ष से ‘जाज ‘ पर प्रतिक्रियाओं के स्वागत को प्रतीक्षित हैं !
अतः निश्चय ही अन्नाजी का व्यक्तित्व महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है !
२.जी नहीं ! १% भी जागरूकता नहीं बढ़ी ! हम भेडचाल के अनुसरण कर्ता थे हैं और कम से कम अगले ५० वर्ष भारत के लोकतंत्र को जागरूकता की प्रतीक्षा ही रहेगी !
३.मांगें मनवाने के लिए अनशन और सत्याग्रह से अच्छा और कुछ विकल्प हो ही नहीं सकता ! किन्तु इसके लिए नेतृत्व का गांधीजी/ अन्नाजी जैसा प्रभावशाली होना अति आवश्यक है ! अन्यथा कईयों नित्यानंद बड़े बड़े पुनीत कारजों के की वेदी पर आहूत होते ही मीडिया द्वारा भी याद नहीं किये जाते ! यदि ऐसे बलिदान से मशाल भी सुलग सके तो बलिदान सफल है किन्तु …..
४. लोकतंत्र की संप्रभुता का हनन लोकपाल से हो सकता है तो लोकप्रतिनिधियों से तो हो ही रहा है ! कम से कम लोकपाल पर महाभियोग सा प्रावधान तो होगा !लोकप्रतिनिधियों को तो चुने जाते ही निरंकुशता का अधिकार मिल जाता है ! किन्तु फिर भी इस पर पुनर्विचार जरूरी है क्योंकि मैंने बहुत निकट से लोकायुक्त की बदले की भावना वाली कार्यवाही के दुष्परिणाम देखे हैं !
५. वैसे तो इस आन्दोलन के अप्रायोजित होने से बहुत निकट से परिचित हूँ क्योंकि इसकी भूमिका विगत वर्ष भोपाल में क्रांतिकारी जैन मुनिश्री तरुण सागर जी के भोपाल चातुर्मास के समय किरण बेदी जी के आगमन पर बनी थी ! किन्तु यदि थोड़ी देर के लिए मान भी लें की सरकार द्वारा प्रायोजित है तो भी अब सरकार के हाथ से बागडोर बहुत दूर हो चुकी है ! वैसे सरकार ने समिति के सदस्यों को आन्दोलन से पूर्व गिरफ्तार कर बहुत ही बड़ा योगदान दिया है ! बाबा ने भी ऐसा सहयोग स्वीकार लिया होता तो आज दो बड़ी मांगों के दो दो बड़े संचालक हमारे साथ होते !
जय हिंद !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Santosh Kumar के द्वारा
August 23, 2011

आदरणीय चित्रांश जी ,.आपने अच्छे जबाब दिए हैं ,..लेकिन इससे सवाल ना तो कम होते हैं और ना ही उनका महत्व कम होता है ,..श्री अन्ना हजारे जी इस आन्दोलन के महानायक हैं ,.लेकिन उनकी टीम पर गंभीर सवाल हैं और बढ़ते ही जा रहे हैं ,..मैं इस आन्दोलन में शुरू से शामिल हूँ (स्थानीय स्तर पर) ,और हर हालत में जन लोकपाल चाहता हूँ ,..लेकिन टीम अन्ना की मंशाएं समझ से बाहर होती जा रही हैं ,.. किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जनमानस बनाने में बाबा रामदेव का सर्वाधिक योगदान है ,..

nishamittal के द्वारा
August 22, 2011

पेचीदा सवाल हैं,चित्रांश जी परन्तु स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि आप क्या चाहते हैं.


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